Day 12 – माताजी के साथ सूक्ष्म रूप में बद्रीनाथ

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ओंकार का उच्चारण प्रारंभ होते ही, हमें अपने देह का स्पर्श पता नहीं चला।ध्यान स्थिति में हम विलीन हो गए।जब माताजी ने “ओ.के” .कहा, तब ध्यान स्थिति से बाहर आए। चंद अनुभवों को सुनने के बाद, माताजी ने कहाकि हम सब  ध्यान स्थिति में अपने सूक्ष्म शरीर में बदरीनाथ गये।जब हिमालय यात्रा कि तैयारी हो रही थी तब बद्रीनाथ जाने का भी प्लान बना ।लेकिन बाद में माताजी के अनुदेश पर प्लान बदल गया और हम वहां नहीं गये।माताजी के संग सूक्ष्म रूप में हम बद्रीनाथ गये यह सोचकर हमारे हृदय में एक आनंद जाग उठी ।एक क्रिया योगिनी मधुश्री जी ने कहा कि उनको ध्यान में गरूड़ पक्षी का दर्शन हुआ।माताजी के बतायी हुई बात और मधुश्री जी का गरूड़ पक्षी को ध्यान में दर्शन  करना,  इस संज्योग से  हमारे हृदय में उस अद्भुत घटना का छाप बन गया।श्री शंकर किशोर जी को धन्यवाद अर्पित करके हम सब अपने कमरे में लौटने को रवाना हुए।अगले दिन देहरादून में ध्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया । अगले  दिन प्रातःकाल ही उठना था, इसलिए कार्यक्रम कि जरुरत चीजों कि तैयारियाँ करके सब  सो गये।

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