दिन ४ – पुनरहिः जनन मरणांत से मुक्ति

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वास्तविकता का क्षण आखिर आ गया| जैसे गंगा नदी की सहायक नदियाँ संगम (संगमम) में विलीन होने  का मार्ग देखते हैं, ठीक वैसे ही, अपने सामान और उम्मीदें बाँधे हुए, हमारी टीम विभिन्न शहरों से प्रस्थान करके मसूरी में संगम के लिए रवाना हुई। हैदराबाद टीम को सुबह 6 बजे तक आरजीआईए हवाई अड्डे पर पहुंचने के लिए कहा गया था। हर किसी के दिल की खुशी उनके चेहरे पर झलक रही थी। जबकि टीम के अधिकांश सदस्य हैदराबाद हवाई अड्डे से शुरू हुए, अन्य सदस्य भी  विभिन्न शहरों से उड़ान भरे। हमारी टीम स्कूली बच्चों की तरह, जैसे शहर के बाहर अपने पहले पिकनिक पर उत्साहित थे| हर आत्मा की सहज भावना थी – “, इस आधुनिक युग में, अगर इस मानव जन्म को धन्य माना जाए, तो गुरु की शरणागत में हिमालय तीर्थ यात्रा  पर जाने के योग्य, हम कितने भाग्यशाली थे। इस हिमालय यात्रा के दौरान, विभिन्न आध्यात्मिक अनुभूतियों में माताजी के करीब होना हमारे लिए दिव्य पुरस्कार के समान था। एक स्व-रिवाइंडिंग टेप की तरह, टीम इस एक लक्ष्य को बार-बार याद कर रही थी, और बड़े उत्साह के साथ फ्लाइट पर चढे।

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