दिन 6 – उचाइयों के डर पर काबू पाना

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सुबह से हमारा सफर निःविराम चल रहा था। लगभग, साढे चार बजे, फिर से हमारे सफर का शुरुआत हुआ। इतनी चढ़ाव के बावजूद, हमारा लक्ष्यअभी तक नज़ारे के पार था| और काफी देर की सफर के बाद हमेंपर्वत की ऊंचाई का अंदाज़ लगने लगा । रास्ते में मेघों के माध्यम से पार होते गये। पहाड़ की अन-सुप्त ऊंचाई धीरे-धीरे टीम पर हावी हो गई।  एक भोलेनाथ (भगवान शिव के लिए सार्वभौमिक दाता के रूप में अनुकूल) मंदिरमार्ग पर दिखाई दिया,समय की कमी के कारण टीम ने बाहर से ही भगवान से अपनी प्रार्थना की । देखते देखते, मंदिर के चारों ओर  लगी लाल झंडे और पास का एक स्कूल बेनज़र होगया ।

और एक  घंटे के सफर के बाद, टीम को, पहाड़ की  ऊँचाइयों में स्तिथ डीआरडीओ, मसूरी कार्यालय दिखा । कार से नीचे देखते हुए, टीम को घाटी की गहराई का एहसास हुआ | अगर ड्राइवर से किसी भी तरह की लापरवाही हुई होती, तो हम सब का जीवन बेहाल हो सकता था।

ऊचाईयों पर चढ़ते समय कुछ जगह कार पीछे खींसका, और मनो हर बार टीम की सांस रुक गयी थी ।

गुरुओं को मन ही मन याद कर के अपने सफर में आगे बढे। हमारे ग्रूप में,  शिव शुक्ला जी ऊंचाइयों (उत्तंगता-भीति) से बहुत डरते थे, लेकिन उस दिन, वह उत्साह से ड्राइवर  की सीट के बगल में बैठे और टीम लगातार चिंतित थी कि उतरने के बाद वह किस परिस्थिति में होंगे।

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