दिन 9 मताजी के सन्निधि ही देवालय

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मुसौरी डी र डी औ में शास्त्र वैज्ञानिकों को सुषुम्ना क्रिया योग ध्यान कार्यक्रम केलिए, उसी रोज़ शाम में काम शुरू किया गया। ध्यान कार्यक्रम हिंदी एवं इंगलिश भाषा में व्याख्यान किया जाने वाला था। माताजी ने हम सभी को हमारे कार्य सौंप कर इस कार्यक्रम को बहुत खूबी से और परीपूर्णता से करने केलिए हमें आशीर्वाद दिये। कुछ लोगो ने अगले दिन ही माता जी द्वारा सौंपा हुआ काम अच्छी तरह से शुरू कर दिया। बाकी सब पास मे शिव मंदिर होकर जो हमारे निवास स्थान से १५ मिनट के दूरी में था, और वहाँ से लौटकर काम शुरू करनेवाले थे।नज़दीक होने के कारण वहाँ पर हम पैदल गये।मंदिर छोटा था लेकिन पूरा मंदिर संगमरमर से बना था। मंदिर में प्रवेश होते ही अच्छे सुवास आने लगे। वहाँ के धुनी से अच्छा सुगंध आ रहा था। शिव जी के विग्रह के बगल में माताजी का भी विग्रह था।वहां पर बैठकर हम सबने थोड़ी देर केलिए ध्यान किया। भारत के उत्तरीय प्रदेशों में ज्यादातर मंदिर कि मूर्तियाँ संगमरमर से ही बनी जाती है। यह मंदिर आधुनिक काल का ही था।ध्यान के बाद डी र डी औ कार्यालय वापस गये। वहाँ पर श्री शंकर किशोर जी, माताजी के संग हमें भी हाल दिखाने लेगये। वहां के संबंधित लोगों को कार्यक्रम मे आने वाले शास्त्रज्ञों की सीटिंग पद्धति दिखाकर खान-पान करने केलिए गए। भोजन के बाद यानी १० बजे के प्रांत में हम सब विश्राम करने निवास स्थान पर लौट गये।११बजे के करीब हड्डियों को कटी हुई ठंडी हवा प्रवाह होने लगी।कंबल कसके ओंडकर हम सोगये।

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