जैसे वसंत ऋतु के आगमन से प्रकृति कुसमित होती ;वैसे ध्यान के आगमन से हमारी आत्मा प्रबोधित् और आनंदित होती है

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जैसे वसंत ऋतु के आगमन से प्रकृति कुसमित होती ;वैसे ध्यान के आगमन से हमारी आत्मा प्रबोधित् और आनंदित होती  है

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