प्रीति अगरवाल

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प्रीति
श्री श्री श्री भोगनाथ महर्षि जी और श्री श्री श्री महावतार बाबाजी ने माताजी को सुषुम्ना क्रिया योग के सर्वोच्च ज्ञान का आशीर्वाद दिया था; इसके उपरांत गुरुओं ने कई योगियों के लिए अपनी उपस्थिति का अनुभव कराये, जिन्होंने समर्पण के साथ इस योग का अभ्यास किया और सुषुम्ना क्रिया योग को प्रसार करने में काम किया। इसका अनुभव कई सुषुम्ना क्रिया योगियों द्वारा किया गया है।
प्रीति उत्तर भारत से हैं। २९ जनवरी २०१९ को, कुंभमेला में, प्रीति को तीन अन्य लोगों के साथ ध्यान करने का अवसर मिला। उन्होंने गंगा नदी में स्नान किया और यज्ञ का प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने सुषुम्ना क्रिया योग से संबंधित पर्चे वहां सभी को बाँटें और उनको ध्यान में भाग लेने का अनुरोध किया। चारों ओर साधुओं के कई समूह थे और उनमें से कुछ ने ध्यान में भी भाग लिया। जैसे ही प्रीति के पिता ध्यान के लिए बैठे, एक योगी का आगमन हुआ। वे वहाँ पर चारों ओर सब कुछ देखे और फिर प्रीति के पिता को देखकर हँसे। जब प्रीति ने उनसे भी ध्यान में शामिल होने का अनुरोध किया, तो वे आनंद होकर मुस्कुराते हुए कहे कि मैं अपने कुटीर में (योगी के निवास का स्थान) प्रतिदिन क्रिया योग का अभ्यास करता हूं। फिर उन्होंने उन्हें अपना ध्यान जारी रखने के लिए कहा और यह भी कहा – “आप सभी को क्रिया योग के बारे में बताएं और अधिक योगियों को बनाएं। इस सुषुम्ना क्रिया योग का अभ्यास करके, आप अपने जीवन में जीत की एक श्रृंखला का आनंद लेंगे।”वे एक महान आभा और ऊर्जा के साथ बहुत खुश दिख रहे थे। उनकी आवाज में अद्भुत्ता और एक झंकार नियंत्रण था। उनके माथे पर तीन रंगों का तिलक था और प्रीति इस योगी को देखकर मंत्रमुग्ध रह गयी । वे थोड़ी देर बाद वहाँ से चले गया। जैसे ही प्रीति के पिता अपने ध्यान से बाहर आए, उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति वहाँ आये वह एक महान व्यक्ति थे। ध्यान करते समय भी वे उस महान व्यक्ति कि सारी बातचीत सुन पा रहे थे। वे अपनी आँखें खोलना चाहते थे और सबको व्यतीत करना चाहते थे कि वे योगी जिसने सबको अपनी उपस्थिति का अनुभव कराए, वे श्री श्री श्री महावतार बाबाजी थे, … लेकिन कुछ सर्वोच्च शक्ति ने उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं दी और वे अपनी आँखें नहीं खोल सके। यह सुनकर, प्रीति और अन्य ध्यानी अभिभूत हो गए और कहे कि, “अरे! हम बाबाजी जैसे सर्वोच्च व्यक्ति को पहचान नहीं पाए … हम उनके पैर छूकर आशीर्वाद भी नहीं ले सके । ”
उन्होंने तुरंत बाबूजी के दर्शन के लिए उनकी खोज करने कि कोशिश की, ताकि वे उनके सन्मान कर सकें। लेकिन बाबाजी उनको कहीं भी नजर नहीं आए! प्रीति आनंद होकर माताजी से अपना आभार व्यक्त किए जिन्होंने उसे इस अद्भुत अनुभवों और दर्शन के प्राप्त कराए । कई सोचते हैं कि केवल माताजी जैसी सर्वोच्च आत्माओं को महागुरुओं का दर्शन होता है, लेकिन सुषुम्ना क्रिया योग के अभ्यास के माध्यम से किसी के लिए भी महान योगियों के दर्शन संभव हैं – और यह घटना उसी का एक साक्षी है।

 

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