एस्.जयंत के अनुभव

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जयंत के माँ ने सुषम्ना क्रिया योग को पहली बार उसे पुरःस्थापित किया था। धीरे-धीरे उसे ध्यान करने की आदत पड़ गई। शुरुआत में ऊर्जा बढ़ने के कारण उसका पूरा शरीर लड़खड़ाता था।
जब माताजी उसके घर गईं। उसे माताजी कि सादगी को देखा और माताजी का स्नेहीय स्पर्श का अनुभव करके ,उसने मन का सच्चा आनंदित स्थिति का अर्थ क्या है वो यह जान सका।

पलानि के क्षेत्र में,ध्यान का अभ्यास करते समय उसे महर्षि भोगनाथ सिद्धार जी के दर्शन हुए।जयंत ने ध्यान स्थिति में खुद से पूछा,कि उसका पूर्ण आत्मा कौन है?ध्यान के अभ्यास में ,उसके प्रश्न के जवाब में उसे सूरज कि दृष्टि दिखाई दिया।

महाविद्यालय के छात्रावास में ध्यान करते समय,उसे महावतार बाबाजी का दर्शन हुआ।एक ओर बार ध्यान करते समय उसे महावतार बाबाजी भ्रूमध्य पर कैसे ध्यान केंद्रित किया जाता है उसे उन्होंने निर्देशित किया।जिससे उसे एहसास हुआ कि किस वजह से महावतार बाबाजी ने उसको दर्शन दिये।
पलानी क्षेत्र में, गुरु पूर्णिमा में साधना करते समय , उसने श्री भोगनाथ सिद्धार जी को उनके ध्यान स्थिति से उनके आसन से उठते देखा।

जयंत के अनुभव उदाहरण है कि, सुषम्ना क्रिया योग ,कैसे, व्यक्तित्व विकास में मदद करता है।
प्री–यूनिवर्सिटी पढ़ने पर और जे ई ई कि तैयारी के दौरान उसे हीन भावना, आत्म संदेह और असफलता का डर होता था। इस ध्यान के कारण, उसने महसूस किया कि उसके पास गुरुओं का समर्थन है और वो ध्यान के अभ्यास से उन आशंकाओं से बाहर आ सका।
जब भी उसे अपने नियमित ध्यान में असातत्य मिला, उसे अपने जीवन से कुछ गायब होता महसूस हुआ करता था। जब उसने ध्यान अभ्यास को फिर से शुरू किया तो उसे आंतरिक संतृष्टि महसूस होता था। वो महसूस किया कि अनजाने में किया गया ध्यान स्वयं में परिवर्तन लाने के लिए स्वयं के भीतर एक अंतर्धारा को उत्प्रेरित कर रहा है।

कैंपस इंटरव्यू के पहले दौर के बाद, उसने बाबाजी का संदेश सुना
“ये दो दिन तुम मेरे पास रहोगे ” इसके साथ ही उसे विश्वास हो गया कि वो चुन लिया जाएगा। अगले दिन जब उसे पता चला कि वह अगले दौर के लिए चुना गया , तो उसका विश्वास और मज़बूत हो गया।
उस शाम बेंगलोर से हैदराबाद कि यात्रा के दौरान, वह उन प्रोसेसर के बारे में पढ़ रहा था जो उसके प्रसंग विषय से संबंधित नहीं था। अगले दिन इण्टरव्यू में उसे उसी विषय के प्रश्न पूछे गए जो उसने पढ़ा था।
बाद में उसने लाइब्रेरी में जाकर बेसिक्स के बारे में अध्ययन किया। उसे आश्चर्य हुआ! कि जो तैयारी उसने की उसीसे अगले दौर में प्रश्न आए।
जब जयंत को चुना गया तो उसे कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि उसे एहसास होगया था कि किसी ने पहले से ही यह सब उसके लिए तय कर दिया है।

जयंत का कहना है कि, उसके जैसे एक मध्यवर्ती छात्र को एलेक्ट्रानिक इंजीनियर कि अवस्था एक उच्च स्थायी कंपनी में नौकरी मिलना ,केवल गुरुओं कि कृपा और उसकी साधना के कारण संभव हो पाया।

जयंत के अनुभव कई लोग जो मनोवैज्ञानिक समस्याओं से पीडित हैं, जिन्हें विफलता का डर और कैरियर की तलाश है उन सब छात्रों कि मदद करता है।

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