श्रीमती स्यामला जी अनुभव

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ओंम श्री गुरोभ्यो नमः परम गुरुओ श्री भोगनाथ सिध्दार जी,श्री महावतार बाबाजी और श्री आत्मानंदमयी माताजी को मेरा प्रणाम। माताजी से मेरा परिचय मेरे पति जो माताजी जी के शिष्य हैं ,के माध्यम से २ ० १ ५ में कराया गया मेरे पति आंध्र प्रदेश पुलिस विभाग में डी.आई.जी के पद पर कार्यगत हैं। तथा वे जब टी.टी.डी. में सी वी स ओ के पद पर कार्यगत थे तब तिरुपति के महती ऑडिटीरियम में गुरुपूर्णिमा पर माताजी के मेडिटेशन प्रोग्राम को हाजिर की और उन्हें बहुत आनंद का अनुभव हुआ। २०१५ अगस्त में मेरी साँस का निधन होगया। २०१५ अक्टूबर में ससुरजी का भी निधन होगया।तथ पश्चात मेरी माँ बीमार होगयी तथा उन्हें हॉस्पिटल मैं भर्ती कर दिया गया। उनकी बयपास सर्जरी हुई सर्जरी के पश्चात अतयं दुर्बलता के कारण उन्हें पैतालीस दिन तक हॉस्पिटल मैं रहना पड़ा। साँस ससुर के निधन तथा मेरी माँ हॉस्पिटल में भर्ती के कारण हम सब बहुत दुखी होगये। उसी दौराण माताजी हमारे घर आकर उनचास दिन का और हर दिन उनचास मिनट का ध्यान आरम्भ किये थे। वे हमें यह विश्वसव दिलाये की सब कुछ अच्छा हो जायेगा। माताजी ध्यान के दौराण अपने अन्य शिष्यों के साथ हमारे घर पधारें। उनचास दिनों के अंदर ही मेरी माँ का स्वस्थ सुधर गया।मेरा विश्वास यह है की यह सब माताजी की कृपा से ही हुआ।तब से मैं माताजी की शिष्य बनगयी। जब भी मैं किसी मुसीबत में हो तो माताजी को हृदय से याद करती हूँ। जब भी मैं तनाव मैं होती हूँ तथा सही निर्णय नहीं लेपाती तो मुझे माताजी का सन्देश किसी न किसी रूप में मिलजाता था। एक दिन मैं बहुत दुखी थी तब मुझे माताजी के प्रिय शिष्य से फ़ोन आया और उन्होंने कहा की माताजी ने उन्हें मुझसे बात करने को कहि थी। मैंने ऐसा कई बार अवलोकन किया है की माताजी मेरे साथ हैं ,मुझे सुन रही है,मुझे देख रही हैं और मेरा ख्याल कर रही हैं। कोई भी अपने माँ के गर्भ मैं सुरक्षित रहतें हैं परंतु माताजी की उपस्थ्ति में पूरा जीवन सुरक्षित रह सकतें हैं। मैं स्वयं को अत्यंत भाग्यशाली समझती हूँ क्योंकि मुझे उनकी छाया मैं स्थान मिला।ओंम श्री गुरुभ्यो नमः।

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