रामचंद्र राजू जी के अनुभव

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पूज्यश्री आत्मानंदमयी माताजी के प्रति संपूर्ण विश्वास और पूरे शरणागत भाव से गनपावरं के रामचंद्र राजू जी और विजयालक्ष्मी जी पिछले १० वर्षों से सुषुम्ना क्रिया योग का अभ्यास कर रहे हैं।
रामचंद्र राजू जी बेहद अनुशासित जीवन जीते हैं। ७५ वर्ष की आयु में भी, वे युवा स्वयंसेवकों के साथ प्रतिस्पर्धा करने वाली नींव की सभी सेवाओं में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
रविवार, १६ जून २०१९ को, दोनों दंपत्ति ने टैम्स आफ इंडिया हैदराबाद के कार्यालय में सामूहिक ध्यान में भाग लेने केलिए प्रस्थान किये। कुछ ही समय में राजू जी ने एहसास किया कि वे अपना पर्स और चश्मा उनके साथ नहीं लाये इसलिए वे घर वापस गये जहाँ उनको सीने में दर्द का अनुभव हुआ,वास्तव में वे प्रातःकाल से ही सीने में दर्द का अनुभव कर रहे थे, जैसे कि वे समूहिक ध्यान में भाग लेने केलिए लिप्त हो जाने के कारण उन्होंने दर्द को नज़र अंदाज़ करदिए और ध्यान सत्र में भाग लिए। जब वह अपने घर वापस आ रहे थे, तब उनको पेट में तकलीफ के साथ सीने में तेज दर्द का अनुभव हुआ और वॉशरूम जाने का तीव्र आग्रह हुआ। जैसे ही वह वॉशरूम में गये, उन्हें अचानक से आंत कि निकासी हुई और पसीने से वे पूरे भीग गये। वे बेचैन महसूस कर रहे थे और उनके सिर में सनसनी जैसा महसूस हो रहा था, लेकिन किसी भी तरह से वह वॉशरूम से बाहर आने में कामयाब हुए। अचानक उन्हें बडी उल्टी हुई और वाँशरूम के निकट गलियारे में गिर गये। ढह जाने के बाद रामचंद्र राजू जी को मृत्यु का अनुभव स्पष्ट रूप से हो रहा था। उनको अपने प्राण शक्ति शरीर को छोड़ने का एहसास हो रहा था। उस समय पर उन्होंने पूज्यश्री आत्मानंदमयी माताजी के द्वारा बताए गए शब्द याद आए कि “सुषुम्ना क्रिया योग साधकों को कभी भी भौतिक शरीर छोड़ने का डर नहीं होना चाहिए क्योंकि यह कर्म -शरीर से मुक्ति है और हमें केवल उस समय अपने महान गुरुओं को याद करना चाहिए”। उनके मृत्यु के अनुभव के उस क्षण में रामचंद्र राजू जी ने केवल गुरु के शब्दों को याद किये और महान क्रिया योगियों के बारे में ही सोचते रहे।
अचानक , महावतार बाबाजी उनके चारों ओर एक तुफान कि धुंधर जैसे दिखाई दिये और उनके जीव शक्तियों को उनके शरीर में वापस धकेल दिये। इस घटना के बाद रामचंद्र जी को दर्द से काफी राहत मिली थी और उनके सभी शारीरिक तकलीफों से उन्हें आराम महसूस हुआ। थोड़ी देर बाद, परिवार के सदस्य उनके पास पहुँचे और उन्हें बेहोश और पसीने में भिगोया देखकर घबरा गए । सदमे की स्थिति में उन सब को एम्बुलेंस सेवाओं को बुलाने के बारे में याद नहीं आया, उन्हें एक टैक्सी मिली और वे उन्हें अस्पताल ले गए। वे २ घंटे की यात्रा के बाद अस्पताल पहुंचने में कामयाब रहे और इस २ घंटे की यात्रा में रामचंद्र राजू जी को कोई आपातकालीन पुनरुत्थान नहीं मिला। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों को आश्चर्य हुआ कि २ घंटों के बाद अस्पताल पहुंचना बिना कोई आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के और कैसे गंभीर दिल के दौरे में मरीज़ इतनी दूर कैसे जीवित पहुंचा। बाद में रामचंद्र राजू जी ने एंजियोग्राम करवाया और उनको स्टेंट लगाया गया ।कुछ समय बाद उन्हें इंटेंसिव कार्डियक कैर यूनिट में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उनकी पत्नी विजयालक्ष्मी जी को उनको देखने केलिए जाने की अनुमति दी गई,उन्होंने जैसे ही उनके पत्नि को देखा वो सबसे पहले पूछे कि.. “हम यहाँ कैसे आए,हम सामूहिक ध्यान में मौजूद होने गये न “। हमारे लिए समझना यह काफी है कि उन्होंने सुषुम्ना क्रिया योग साधना में खुद को कितना समर्पण किये और उनके इस समर्पन कि भाव के कारण उनको सराहकर महान गुरुओं ने उन्हें दूसरा जन्म का उदार दिये।
उन्हें उस गंभीर स्थिति से वापस जीवित होना संभवतःमेडिकल सैंस्स में एक चमत्कार है ,जब कोई मरीज़ को दिल का दौरा पड़ता है। यह इतना गंभीर था, कि उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम हो गया था, जिससे उनको तुरंत गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल ट्राक्ट खाली करना पडा।इस अवस्था में , वे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सदमे में पहुंचे , जिसका अर्थ है कि पूरी आंत ने विचित्र अभिनय करना शुरू कर दिया और उन्होंने अचानक अपनी पूरी आंत खाली कर दी। इसके कारण गंभीर हाइपोटेंशन हुआ, यह बहुत ही कम अपरिवर्तनीय रक्तचाप (बीपी) की स्थिति थी जिससे सरक्युलेटरी फेलियर् होता है जिसके वजह से अंततः मस्तिष्क, किडनी आदि जैसे महत्वपूर्ण अंगों को रक्त की आपूर्ति को बंद कर देता है। यह आमतौर पर किसी भी शरीर के लिए जीवन का अंत होने के बराबर है।यही रामचंद्र राजू जी के साथ भी हुआ था, परंतु महान क्रिया योग निपुण महावतार बाबा जी के चमत्तकारी हस्तक्षेप के कारण उनको नयी स्वस्थ जिंदगी लगाम में मिला।सुषुम्ना क्रिया योग के महान परमगुरुओं के पावन चरणों पर हमारा प्रणाम।
ओं श्री गुरुभ्यो नमः

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