दिन २ – माताजी के साथ हिमालय यात्रा का दिव्य अवकाश |

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“गरुर साक्षात परब्रह्मा” यह वाक्य पूज्य श्री आत्मानंदमयी माताजी का उपयुक्त वर्णन है।केवल वे लोग जो परम दिव्यता और अपार ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ ध्यान कर रहे हैं, माताजी के दिव्य स्वर्णमयी  स्वरूप के दर्शन कर सकते हैं, जो विश्व में व्यापित है।माताजी का यह रूप दर्शन करने केलिए बहुत योग शक्ति की आवश्यकता है।साधकों मे भक्ति, परीपूर्ण गुरु भावना, और प्रेम के द्वारा ही माता जी के तत्व को जान सकते हैं।महा सिद्ध श्री श्री भोगनाथ महर्षि जी, श्री श्री महावतार बाबाजी के साथ पूज्यश्री आत्मानंदमयी माताजी पूरे विश्व में दिव्य कार्य कर रहे हैं और सुषुम्ना क्रिया योग के द्वारा निःशुल्क विश्व व्याप्ति निर्वाहन कर रहे हैं।दिव्य बाबा जी सुषुम्ना क्रिया योगा फौन्डेश्न के संस्थापक,पूज्यश्री आत्मानंदमयी माताजी द्वारा कई जगहों पर संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए विशेष जागरूकता और निशुल्क ध्यान के माध्यम से आनंदमय जीवन का निर्माण किया गया हैं।
2015 में पूज्यश्री आत्मानंदमयी माताजी भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों को दीक्षा देने के लिए हैदराबाद डी र डी ओ में विशेष दीक्षा सेवा और ध्यान कार्यक्रम की व्यवस्था की।
सुषुम्ना क्रिया योग साधन करके कयी वैज्ञानि लाभान्वित हुए ।इसके परिणामस्वरूप, 2016 में, डी र डी ओ के डैरेक्टर, ने मसूरी के रक्षा अधिकारियों के लिए एक ध्यान कार्यक्रम आयोजित करने का अनुरोध किया।विनम्र निवेदन स्वीकार
करते हुए, माताजी ने अपनी सहमति दी और हिमालय सैर के लिए विस्तृत व्यवस्था की गई। उनके आशीर्वाद से, कुछ चुनिंदा बहुभाषी और हिंदी भाषी शिष्यों ने, माताजी के साथ पवित्र यात्रा पर जाने के लिए अपनी यात्रा शुरू की; और उनके अच्छे “प्रारब्ध” कर्म (पिछले जन्म के अच्छे कर्म) के लिए भाग्यशाली महसूस किया। इन सौभाग्यशाली लोगों के लिए, माताजी की उपस्थिति में यह हिमालय यात्रा अविस्मरणीय यादों के साथ उनके जीवन को भर , और चमत्कारिक अभिव्यक्तियों ने आध्यात्मिक मूल्यों में समृद्ध कर दिया। इस पवित्र समय के 49 दिनों के दौरान, इस हिमालयी यात्रा के पारमार्थिक अनुभव और माताजी के साथ होने का सार, हर पाठक को प्रेरित और उनकी खोज का मार्गदर्शन करेगा।

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